
Astrology houses in Hindi – दोस्तों आज सबसे पहले ये समझते हैं ज्योतिष भाव हैं क्या? कुडंली के तीन प्रमुख तत्व या element हैं – पहला है भाव या घर या house – जैसे पहला भाव दूसरा भाव इस तरह बारहवें भाव तक बारह घर हैं| ये भाव या घर fix हैं जैसा की साइड में बने कुंडली में आप देखेंगे 1 नंबर, 2 नंबर…. से 12 नंबर तक ये बारह भाव हैं| चूंकि Zodiac या राशिचक्र को 360 डिग्री मानते हैं इसलिए इन बारह भावों को समान रूप से 30 डिग्रियों में बांटा गया है|
कुंडली का दूसरा element है राशि| साइड में बनी कुंडली में आप राशि भी देख सकते हैं – एक नंबर में मेष, दुसरे में वृषभ से लेकर बारहवें में मीन राशी| एस्ट्रोनॉमी के अनुसार ये बारह राशियाँ पूरे 24 घंटों में अन्तरिक्ष में विचरण करती है इस प्रकार तकरीबन 2 घंटों में कोई न कोई राशी पूर्व क्षितिज में उदय होती है|
जन्म के समय के अनुसार जो राशी पूर्व क्षितिज में उदय हुई थी, उस राशि को कुंडली के पहले भाव या पहले घर में स्थित कर बाकी ग्यारह राशियों को अघटीवत रूप से (anticlockwise) बाकी के ग्यारह भावों में स्थित कर दिया जाता है| मान लीजिये जन्म के समय मिथुन राशी उदय हो रही थी तो मिथुन राशी को कुंडली के पहले भाव में, दुसरे में कर्क, तीसरे में सिंह आदि इस तरह राशियों का क्रम बनेगा|
कुंडली का तीसरा element है ग्रह| साइड में बनी कुंडली में आप ग्रहों को देख सकते हैं| ये ग्रह भी अन्तरिक्ष में अपनी अपनी धुरी पर विचरण करते रहते हैं और किसी न किसी राशी में स्थित रहते हैं| जन्म के समय जो ग्रह जिस राशी में स्थित थे उन्हें कुंडली में भी उन्ही राशी में स्थित कर दिया जाता है| अगर जन्म के समय ब्रहस्पति मिथुन में रहे होंगे तो कुंडली में भी उन्हें मिथुन में ही रखा जाएगा|
राशिमंडल का हर भाव मानव जीवन के किसी न किसी पहलू से जुडा है| ज्योतिष के ये भाव (Astrology Houses) जीवन के ख़ास ख़ास क्षेत्रों का निरूपण करता है| जैसा मैंने ऊपर कहा जन्म के समय से लग्न निर्धारण कर इन्ही राशियों को ज्योतिष के भावों में स्थित किया जाता है| इन राशियों और ग्रहों की सम्मिलित उर्जा इन ज्योतिष भावों (Astrology houses) में operate होकर मानव जीवन में उन भावों से जुड़े अनुभवों को पैदा (create) करती है|
ज्योतिष के ये बारह भाव (Astrology Houses) हमारे जीवन के उन अनसुलझे टुकड़ों को चित्रित करते हैं जो मानव जीवन नामक चित्र खंड पहेली (zig-saw puzzle ) में लग कर उसे सुलझाते हैं| जो ग्रह और राशि इन भावों को occupy करते हैं, उस भाव से जुड़े जीवन के उसी पहलू को ये प्रभावित करते हैं| ये बारह भाव मिलकर समूचे जीवन का अस्तित्व जैसा की दुनिया में भोगा जाता है, उसे represent करते हैं |
हमारा समूचा अस्तित्व इन बारह ज्योतिष भावों (Astrology Houses) उनमे स्थित ग्रहों और राशिओं में प्रतिबिंबित है| अगर हम सौरमंडल और उसके खगोलीय पिण्डों (celestial bodies) पर गौर करें, और मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गौर करें, तो पायेंगें की हर celestial body जीवन के किसी तदनुरूप पहलू से जुडा है|
जीवन का पूरा फैलाव इन १२ भावों में मानचित्रित है जो हमारे जीवन के विभिन्न अवस्थाओं से जुड़ा है| लग्न भाव या प्रथम भाव जन्म से जुड़ा है, द्वितीय भाव शैशवकाल से, इस तरह चलता हुआ द्वादश या बारहवें भाव तक जो मृत्यु या शरीर के क्षय से जुडा है| अगर शारीरिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो लग्न या प्रथम भाव शीर्ष और सर से, द्वितीय भाव मुख से इस तरह आगे बढ़ता हुआ बारहवां भाव पैर से जुडा है| इस तरह हमारा पूरा self, समूचा जीवन और जीवन का हर पहलू इन बारह ज्योतिष भावों (Astrological houses) में mapped है |
नीचे दिए गए links में इन बारह ज्योतिष भावों के main कारकत्व (significations) को संक्षिप्त रूप में दिया गया है| हर लिंक पर तीन तीन भावों का वर्णन है जिन्हें आप क्लिक कर के पढ़ सकते हैं| ज्यादा विस्तृत व्यक्तिगत विश्लेषण के लिए, सम्पूर्ण कुंडली का अवलोकन करना पड़ता है जिससे ग्रहों की युति, उनकी दृष्टि, राशिओं में प्लेसमेंट वगैरा आदि को देखना पड़ता है |

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