
Guru ka Atichari Gochar 2025 Vrishabh rashi का ये एक साधारण (normal) गोचर नहीं है, इसलिए इसे समझना आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह कई वर्षों के बाद होने वाला एक दुर्लभ गोचर है ये जो काफी लम्बा चलेगा। बृहस्पति जब किसी भी राशि में तेजी से आगे बढ़ते है मतलब अतिचारी गोचर, तो अशांति पैदा कर सकते है और उस समय लिए गए निर्णय हमेशा ऐसे नहीं होते जो आगे चल कर सही साबित हों।
अतिचारी गोचर क्या है?
सबसे पहले संक्षिप्त में ये समझतें हैं की “अतिचारी गोचर” है क्या? ज्योतिषमंडल में समस्त ग्रह विभिन्न राशियों में सूर्य के चारों और एक निर्धारित गति से चलते हैं। कभी कभी इनकी इस निर्धारित गति में परिवर्तन आता है और ये ज्यादा तेज गति से राशियाँ बदलते हैं, जिसे “अतिचारी गोचर” से जाना जाता है। ऐसे में atichari ग्रह अस्थिर यानी volatile हो जाते हैं और अपने सामान्य प्रभावों से अलग फल देते हैं।
इस तेज गति का कारण है की ग्रह सूर्य की वृत्ताकार परिक्रमा नहीं करते बल्कि अंडाकार रूप (elliptical) में परिक्रमा करते हैं। ऐसे में जब ग्रह सूर्य से perihelion (सूर्य से पास) में होंगे तो उनकी कोणीय गति तेज़ होगी जिसे “अतिचारी” (तेज गति) गोचर कहा जाता है। इतिहास गवाह है की जब जब ब्रहस्पति अतिचारी हुए हैं, तब तब दुर्लभ घटनाएँ हुई हैं।
Guru ka atichari gochar 2025 Mesh Rashi में 14 मई को गुरु अतिचारी चाल से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। 18 अक्टूबर को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु 11 नवंबर को वक्री अवस्था में आएंगे और फिर 05 दिसंबर को फिर से मिथुन राशि में गोचर कर जाएंगे। इसके बाद साल 2026 जून में गुरु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और अक्तूबर 2026 में सिंह राशि में गोचर करेंगे।
Normally 12-13 महीने चलने वाला गोचर अब 6 महीने या उससे भी कम चलेगा।
ब्रहस्पति अतिचारी होंगे तो क्या होगा?
जब बृहस्पति की गति तेज हो जाती है, तब यह जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे कि करियर, प्रेम एवं वैवाहिक जीवन, संतान, ऐशवर्य, उन्नति और विकास आदि पर गहरा एवं महत्वपूर्ण प्रभावडालते है। बृहस्पति बुद्धि, समझ और सौभाग्य का प्रतीक है इसलिए जब यह तेज गति से चलता है, तो इसके त्वरित और गंभीर परिणाम देखने को मिलते हैं। इस समय बृहस्पति ज्यादा तेज गति से चल रहे हैं जिस वजह से बृहस्पति अपने प्राकृतिक कारकत्व में कमी लाएंगे।
अभी ये गोचर 14 मई से मिथुन राशी में होगा और मिथुन राशी बुद्धि, अभिव्यक्ति, संवाद, शिक्षा, यात्रा, नेटवर्किंग एवं सामाजिक सम्बन्धों आदि का प्रतिनिधित्व करता है। इस अतिचारी गोचर के कारण अवसरों में जल्दबाजी की भावना पैदा हो सकती है, जिससे निर्णय लेने में जल्दी करने की आवश्यकता होगी या फिर ऐसी opportunities को खोने का रिस्क उठाना पड़ेगा। बौद्धिक खोज, नेटवर्किंग और अल्पकालिक लक्ष्यों में गतिविधि में तेजी देखी जा सकती है। नकारात्मक पक्ष यह है कि ये अतिचार गति ऊर्जा को बिखेर सकती है, जिससे एक तरह की विभ्रांति – confusion पैदा हो सकती है।
Guru ka Atichari Gochar 2025 Vrishabh rashi
Guru ka Atichari Gochar 2025 Vrishabh rashi के लिए धन का मार्ग खुलेगा या संकट का ?
Guru ka Atichari Gochar 2025 Vrishabh rashi के लिए साल 2025 में 14 मई से बृहस्पति दूसरे भाव में गोचर करेंगे। यह भाव धन, कुटुंब, वाणी तथा ऐश्वर्य आदि से सम्बन्ध रखता है।
- बृहस्पति आपकी कुंडली के आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी है।
- कुंडली का आठवां भाव दुश्स्थान के रूप से जाना जाता है जो पैत्रिक संपत्ति, आकस्मिक घटनाओं, विपदा, रुकावटें तथा आपदाओं और सम्पूर्ण कायापलट – यानि total transformation का भी भाव है जबकि ग्यारहवां भाव लाभ का एवं बड़े भाई-बहनों का भाव है।
- Guru ka Atichari Gochar 2025 Vrishabh rashi में बृहस्पति के दूसरे भाव में गोचर के कारण अचानक आर्थिक लाभ के अवसर मिल सकते हैं।
- कार्यस्थल पर नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
- Guru ka Atichari Gochar 2025 Vrishabh rashi में आपका पारिवारिक जीवन अधिक सुखद रहेगा और आपके परिवार में शुभ कार्यक्रम हो सकते हैं।
- बृहस्पति ऐश्वर्य और पारिवारिक संपत्ति का भी कारक है।
- Guru ka Atichari Gochar 2025 Vrishabh rashi के दौरान देवगुरु बृहस्पति का दूसरे भाव में होना अत्यंत शुभ माना जाता है। आमतौर पर यह सौभाग्य, आर्थिक समृद्धि और मज़बूत नैतिक मूल्यों का संकेत देता है।
- यह गोचर संचार कौशल को बढ़ाएगा, जिससे यह बातचीत और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए एक अच्छा समय होगा।
- परन्तु आठवें भाव का स्वामी होने की वजह से बृहस्पति Guru ka Atichari Gochar 2025 Vrishabh rashi में आपके लिए कुछ वित्तीय समस्याएं भी पैदा कर सकते हैं।
- वहीं अतिचारी बृहस्पति आपकी सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, इस दौरान अपने स्वास्थ्य में लापरवाही बिलकुल ना बरतें।
- Overall यह समय आपके लिए औसत से अच्छा रहेगा।
उपाय-यदि स्वास्थ्य अनुमति दे तो गुरुवार को व्रत रखें। बृहस्पति बीज मन्त्र “ॐ ब्रम बृहस्पतये” का 108 जाप करें।
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