
Tenth house in Hindi – दशम भाव ज्योतिष भाव कुडंली का सबसे सक्रिय भाव है| इसे कर्म भाव से जाना जाता है क्यूंकि ये भाव हमारे समस्त कर्मों का भाव है| जीवन में हम सब कर्म करते रहते हैं और अपनी आजीविका कमाना भी एक कर्म है| इसीलिये किसी भी तरह का व्यवसाय कर्म से सम्बंधित है| दशम भाव directly कर्म को control करता है|
कर्म को दशम भाव में क्यों रखा गया है? पहली बात दशम भाव को कुंडली का Zenith – सर्वोच्च शिखर भाव माना जाता है और चूंकि कर्म करते रहना जीवन है, अकर्मण्य होना मृत्यु, तो ऐसे महत्वपूर्ण subject को सर्वोच्च शिखर भाव में ही रखा जाना चाहिये| दूसरी बात दशम भाव पंचम भाव से छठा भाव है – हमारे पूर्व कर्मों के सबसे अनजाने तथ्य दशम भाव में है क्यूंकि पंचम भाव पूर्व पुण्य भाव है और हमारे इस जन्म के कर्म हमारे पूर्व पुण्य कर्मों से directly related हैं| शास्त्र कहते हैं की लग्न कमजोर हो, पंचम भाव पीड़ित हो, और नवम भाव भी बलहीन हो यानी तीनों महत्वपूर्ण शुभ त्रिकोण भाव पीड़ित हों और सिर्फ दशम भाव ही strong हो, तो भी वो जातक लम्बी, सफल और उन्नत जीवन जीने में सक्षम हो जाता है|
दशम ज्योतिष भाव (Tenth house in Hindi) से क्या देखते हैं?
- Profession, नौकरी, काम धंधा
- व्यवसाय के स्रोत
- व्यावसायिक श्रेष्ठता
- आय के स्रोत, यश
- मान सम्मान, मर्यादा
- सरकार, सरकारी नौकरी
- political power
- पिता की घर संपत्ति
- त्याग की प्रवृत्ति
- धार्मिक पुण्य कर्म
- जीवन में status, इज्जत और शोहरत
- पदोन्नति
- व्यावसायिक स्वतंत्रता
ऊपर कहा गया है की पिता की घर संपत्ति भी इसी भाव देखते हैं, मगर अगर ये भाव सबसे ज्यादा “कर्म” से सम्बंधित है तो इस भाव से पिता की घर संपत्ति का कैसे पता चलता है ? Actually पिता का घर या पितृ भाव नवम भाव है जबकि दशम भाव नवम से दूसरा है और ज्योतिष में दूसरा घर धन संपत्ति भाव है|
दशम ज्योतिष भाव (Tenth house in Hindi) हमारे कार्य करने के तरीके भी दिखाता है साथ ही साथ बाहरी दुनिया हमें किस तरह से देखती है , किस तरह से recognise करती है, ये भी दिखाता है| इस भाव पर किसी भी तरह का अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव व्यवसाय में सफलता या असफलता, यश या अपयश, कार्य क्षेत्र में support या opposition आदि दर्शाती है| दशम ज्योतिष भाव (Tenth house in Hindi) जीवन के वो साल दिखाता है जब हम पूरी तरह से उत्पादित fully productive और पूरी तरह से career oriented होते हैं| इस भाव के कारक सूर्य, बुध, ब्रहस्पति और शनि हैं|
Physically ये भाव पैर के निचले हिस्से घुटनों को दिखाती है| Natural zodiac यानि कालपुरुष राशिचक्र में दशम भाव मकर राशि है जिसके स्वामी शनि हैं| शनि को कर्माधिपति की उपाधि मिली हुई है जो हमारे समस्त कर्मों के स्वामी होकर सेवाभाव, कर्ताय्निष्ठा और दैनिक दिनचर्या को चरितार्थ करते हैं| दशम ज्योतिष भाव (career house astrology in Hindi) आखिरी अर्थकोण (money mattered trine) और महत्वपूर्ण केंद्र (Quadrant,) है क्यूंकि ये हमारे वर्तमान जीवन के कर्मों से deal करता है |
एकादश भाव
एकादश ज्योतिष भाव को लाभ भाव भी कहतें हैं| दशम भाव कमाया हुआ धन है जो इस जन्म में मेहनत और मशक्कत करके कमाया जाता है जबकि एकादश भाव वो धन है जो बिना मेहनत कमाया जाता है| वो धन जो बिना पसीना बहाए easily कमाया जाये| इसीलिये इसे लाभ और वृद्धि का भाव कहा गया है| अगर आपने एक रूपये का काम किया और एक रुपये प्रॉफिट के साथ आपको दो रुपये और मिल गए तो ये दो रुपये बिना काम किये easy money है जो एकादश भाव से देखा जाता है| एकादश भाव को उपचय भाव भी कहते हैं, उपचय का मतलब है वृद्धि – growth, जो भी यहाँ होगा वो बढेगा|
एकादश ज्योतिष भाव से क्या देखते हैं?
- आय
- मुनाफा
- उपलब्धि
- अभिलाषाओं और आकांक्षाओं की पूर्ती
- उपार्जन के स्वरुप
- पुरस्कारों की प्राप्ति
- खिताब और इनाम
- बड़े भाई या बहन
- दुर्घटना (छठे से छठा भाव होने की वजह से)
- पहली संतान की पत्नी या पति (पंचम से सप्तम भाव होने की वजह से)
हमारे कर्मों के निहित फल से ये भाव deal करता है| दशम भाव (Tenth house in Hindi) से जो कर्म किया जाता है, वो कर्म फल चाहे लाभ रूप में चाहे हानि रूप में, इसी एकादश भाव से मिलता है| समस्त जीवन व्यस्तता से काम करने के बाद जब सेवा निवृत्त हो कर अपने कर्मों के फल को enjoy करते हैं या नहीं, वो कालचक्र भी इसी भाव से देखा जाता हैं|
Physically ये पैर के तीसरे हिस्से पिंडली और अग्रजन्घा को दिखाती है| natural zodiac यानि कालपुरुष राशिचक्र में यह भाव कुम्भ राशि है जिसके स्वामी शनि हैं| ये भाव आखिरी कामकोण (the desires trine) है| कामना अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी, इस तरह एकादश भाव अध्यात्मिक व्यक्ति के लिए वो आखिरी प्रलोभन बन जाती है जिसे पार करके, जिस पर विजय प्राप्त करके ही अंतिम लक्ष्य यानी निर्वाण या मुक्ति की प्राप्ति है| ब्रहस्पति इस भाव के कारक हैं|
द्वादश भाव
दशम भाव से कर्म कर के, एकादश भाव में कर्मफल भोग कर, द्वादश भाव में सम्पूर्ण समाप्ति है| इसीलिए द्वादश ज्योतिष भाव व्यव भाव (loss) मोक्ष भाव (salvation) आदि से भी जाना जाता है | कुंडली का अंतिम भाव होते हुए ये जीवन के आखिरी पड़ाव, final end, सब कुछ समाप्त कर देने वाली अपरिहार्य मृत्यु का भाव है |
द्वादश ज्योतिष भाव से क्या देखते हैं?
- किसी भी तरह की हानि – loss
- अच्छे या बुरे कर्मों के लिए व्यय
- निवेश
- विदेश में अस्पताल में भर्ती होना
- Jail कारागृहवास
- आश्रमवास
- Final उद्धार
- दैविक ज्ञान
- शय्या के सुख
- विदेश गमन
- विदेशों में जीवनयापन
- गुप्त शत्रु
- मानसिक चिंता
- निद्रा का loss – अनिद्रा
- गोपनीय ज्ञान
- कोई भी गुप्त क्रिया
- जीवन साथी का loss
- दुर्भाग्य
- तकरार
- किसी चीज का खोना
- Separation वियोग
- संन्यास
- एकांतवास
शारीरिक रूप से बाईं आँख और पैर का अंतिम भाग – चरण इस भाव से देखे जातें हैं| Natural zodiac यानि कालपुरुष राशिचक्र में यह भाव मीन राशि है जिसके स्वामी ब्रहस्पति हैं| ये भाव आखिरी मोक्षकोण (salvation trine) है और एक अध्यात्मवादी के लिए ये सबसे महत्वपूर्ण भाव है क्यूंकि ये मुक्ति एवं अध्यात्म से जुड़ा है|

Join the Discussion!