Shani Jayanti – इस वर्ष की Shani jayanti बहुत खास है| इस वर्ष Lord Shani जयंती के शुभ अवसर पर एक खास परिवर्तन योग है| और साथ ही सूर्य चन्द्र के राशीश उच्च के होकर गुरु से दृष्ट हैं|
इस वर्ष शनि जयंती 25 मई 2017 को पड़ रही है| पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 25 मई 2017 को सुबह 05:07 से शुरू होकर 26 मई 2017 को early morning 01:14 पर समाप्त होगी|
Lord Shani graha कर्माधिपति, अनुशासन प्रिय और न्याय प्रिय ग्रह हैं| Shani Jayanti को Lord Shani के जन्म दिन के रूप में अनुष्ठीकृत किया जाता है| इस दिन के किये गए अनुष्ठान, पूजा कर्म, उपवास और दान कर्म आदि हमें Shani Dev की कृपा के पात्र बनाते हैं, और Shani God की कृपा के इना जीवन में कुच्छ भी हासिल नहीं किया जा सकता|
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Lord Shani Jayanti 2017 क्यों इतनी खास है?
इस वर्ष Shani Jayanti के शुभ अवसर पर एक खास परिवर्तन योग है| इस दिन चन्द्र सूर्य के कृत्तिका नक्षत्र में स्थित हैं और सूर्य चन्द्र के रोहिणी नक्षत्र में| सूर्य चन्द्र के राशीश शुक्र उच्च (Exalted) के हो कर ब्रहस्पति के मीन राशी में स्थित हैं और ब्रहस्पति से दृष्ट हैं| उच्च के शुक्र ब्रहस्पति को दृष्टि भी दे रहे हैं|
कृत्तिका नक्षत्र Shani Dev के पिता सूर्य का नक्षत्र है और कृत्तिका नक्षत्र के अधिदेव अग्नि हैं| तो इस दिन के हवन (Hawan) होमम (Homam) और यज्ञ (Yagya) आदि का विशेष महत्व है|
Shani Dosh शान्ति के लिए, शनि की साढ़े साती (Sade sati) के लिए और शनि की कृपा प्राप्ति के लिए ये यज्ञ हवन आदि किये जाते हैं|
पर problem यह है की Shani Jayanti इस वर्ष गुरूवार के दिन पड रही है जो की सबके लिए working day है| तो working day में पुरोहित को arrange करना, यज्ञ आदि कर्म करना क्या इतना आसान है? बिलकुल नहीं|
जैसा मैं पहले भी कहता आया हूँ हम लोग कलियुग में जी रहे है| कलियुग को नाम युग भी कहा गया है| पूरी भक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ इस कलियुग में कर्म स्वयम करें| भगवान् भाव के प्यासे हैं| खुद का पूरे भाव और समर्पण से किया गया कर्म किसी पुरोहित से किये गए यज्ञ हवन आदि से कम नहीं है|
तो आइये इस वर्ष आपको शनि पूजा का एक सरल उत्तम और असरदार पूजा विधि बताता हूँ जिसे कर के आप Lord shani के कृपा पात्र बन सकते हैं|
Lord Shani Jayanti सरल पूजन विधि
शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठा कर स्नानादि से निवृत्त होकर काली शाल या कोई काला कपडा हो तो उसे बिछा कर पूजा में बैठें| यदि काली धोती हो तो उसे पहनें, नहीं है तो कोई बात नहीं|
शनि देव की लोहे की मूर्ति हो या फोटो हो तो उसे अपने पूजा स्थान पर रखें, नहीं है तो हनुमान की फोटो के आगे भी ये पूजा हो सकती है| आपके पास कोई भी विग्रह नहीं है तो भी कोई बात नहीं, आप पूरे मन से शनि देव पर मानसिक ध्यान लगाईये|
सर्वप्रथम तिल के तेल का दीपक जलाएं| पूजन में दीपक अग्नि तत्व है जिसके द्वारा आपकी पूजा, अर्चना, प्रार्थना एवं भोग आकाश तत्व के साथ देव को समर्पित होता है| दीपक ज्ञान प्रकाश का द्योतक ब्रह्म स्वरुप भी है और समस्त कर्मों का साक्षी भी|
एक लोहे के बर्तन में 800 ग्राम सरसों का तेल लें| उसमे 8 दाने काले चने के, 8 दाने जौ के, 8 दाने काली उड़द एवं 8 सिक्के डाल कर एक बार अपना मुंह देख कर पूजा स्थान पर रख दें|
अब शनि के बीज मंत्र 108 जाप करें|
ॐ शं शनैश्चराय नमः
इसके बाद पौराणिक शनि मंत्र का 9 जाप करें:
नीलांजन समाभासम रविपुत्रम यमाग्रजम |
छाया मार्तण्ड सम्भूतम तम नमामि शनैश्चरम ||
इसके बाद शनि विग्रह/तेल पात्र की दीपक से 9 आरती करें| इसके बाद शुद्ध जल के साथ शनि देव को भोग लगायें| भोग में काली उड़द की खिचड़ी चढ़ा सकते है, नहीं तो फलों से भी भोग लगा सकते हैं|
शनि को भोग लगाने वक्त आपका भाव ये होना चाहिए की हे शनि देव अपने तुच्छ ज्ञान और भक्ति के साथ जो भी, जितना भी बन पड़ता है, उससे मैं आपकी कृपा के लिए आपके नतमस्तक हूँ, मेरी पूजा अर्चना आराधना स्वीकार कीजिये, इस भोग को स्वीकार कर मुझे और मेरे परिवार को कृतार्थ करें| जो भी जाने अनजाने में गलती हुई हो उसे सदा सर्वदा माफ़ करें और मुझ पर तथा मेरे परिवार पर इस पूरे वर्ष अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखें, अगले वर्ष इससे और अच्छी तरह मैं आपकी अर्चना आराधना कर सकूँ, ऐसा मुझे अवसर दें| हे कर्माधिपति शनि देव, मेरे व्यवसाय पर सदा अपनी कृपा दृष्टि रखें, मेरे नीचे और ऊपर काम करने वालों का सदा सहयोग प्राप्त हो, मैं अपने काम में सदा उन्नति और तरक्की प्राप्त करूँ, ऐसा मुझे आशीर्वाद दें| मेरे घर परिवार में सदा शांति ख़ुशी और बरकत बनी रहे, आपकी शुभता ही मेरे घर में व्याप्त हो|
इस तरह पूरे मन और भाव से जो भी प्रार्थना हो वो करें, फिर हनुमानाष्टक का पाठ करें, और हनुमानजी की आरती करें|
पूजा के बाद दीपक लेकर पूरे घर में दीपक की जोत दें, दीपक रख कर प्रसाद ग्रहण करें और घर में बांटे| पूजा के बाद लोहे के तेलपात्र को तेल समेत शनि मंदिर में दे आयें| यदि स्वास्थ्य allow करे तो व्रत का संकल्प ले कर व्रत रखें| पूरे दिन शनि ध्यान करें, अनावश्यक बात चीत से बचें, किसी तरह का नशा ना करें|
साढ़े साती और नीच के शनि का सर्वोत्तम उपाय – दान का नीलम
तुला वृश्चिक और धनु राशी के लिए ये Lord Shani के साढ़े साती का समय है| साढ़े साती साढ़े सात वर्ष का वो समय है जब शनि देव चन्द्र से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में गोचर करते हैं| इस दौरान शनि मनुष्य को जीवन के समस्त पाठ पढ़ा कर, जीवन के मूल्यों को सिखाते हुए, पीड़ा और कष्ट देकर मानव जीवन को तपा कर, अनुशासित करते हैं|
कुंडली में शनि यदि नीच का है, या चंद्रमा नीच का या पीड़ित है तो साढ़े साती बहुत ही कठिन समय हो सकती है| व्यवसाय पर, प्रतिष्ठा पर, रिश्तों पर, स्वास्थ्य पर यहाँ तक की जीवन पर भी प्रतिकूल असर देखा जाता है|
शास्त्रों में शनि के इस तरह की पीड़ा को कम करने के लिए नीलम दान का बड़ा महत्व बताया गया है| पुराने ज़माने में तो ये फिर भी सम्भव था, पर आज के समय में इतना महंगा नीलम दान करना आसान नहीं है| तो आइये आज आपको दान के नीलम और शनि की पीड़ा कम करने का एक चमत्कारिक प्रयोग बताता हूँ|
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शनि की साढ़े साती या नीच के शनि का चमत्कारिक उपाय
किसी भी शनिवार को 8 रत्ती के ऊपर का दान का नीलम एक लोहे के पात्र में तिल के तेल में डाल कर अपने पूजा स्थान पर प्रतिष्ठित करें| इसमें 8 सिक्के और थोड़े काले तिल भी डाल दें| नित्य स्नानादि से निवृत्त होकर 44 दिन तक बिना break के ऊपर दिये गए शनि के बीज मंत्र की एक माला करें| 108 जाप माला उँगली पर भी कर सकते हैं|
बीज मन्त्र के बाद शनि के नीचे दिये गए पीड़ा निवारण मंत्र का 9 बार नित्य जाप करें:
सूर्यपुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्षः शिवप्रिय |
मंदचारः प्रसन्नात्मा पीडां हरतु में शनि ||
इस तरह 44 दिन continuously इस अनुष्ठान को करें| अनुष्ठान के समय सात्विक प्रवृत्ति रहनी चाहिए| 45वें दिन पात्र के साथ शनि मंदिर जा कर नीलम तेल से निकल कर शनि को चढ़ा कर, ब्राहमण या पुरोहित को दान कर दें| तेल शनि देव पर चढ़ा दें| हो सके तो गरीबों को कुछ दान दें|
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