
Navagraha Sun – समस्त सौरमंडल में सूर्य सबसे महत्वपूर्ण ग्रह हैं| सूर्य प्रकाश, उर्जा और ताप के स्तोत्र हैं जिनके बिना धरती पर कोई जीवन संभव नहीं| वेदों के अनुसार सूर्य सौमंडल के समस्त घटित घटनाओं के मूल जनक हैं|
सूर्य को “आदित्य” कहा जाता है जिसका मतलब है सबसे पहले जन्म लेने वाला| सूर्य को शास्त्रों में “भूतस्य जातः” भी कहा गया है जिसका मतलब है पंचमहाभूतों के सृष्टिकर्ता| पंचमहाभूत हैं -पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – जिससे हर वस्तु को आकार मिलता है|
सूर्य उत्पति से related हैं इसीलिए सूर्य को पिता का कारकत्व मिला है| पिता के वीर्य में हमारी आत्मा शरण लेकर माता के गर्भ में शरीर धारण करती है – सूर्य के आत्मकारक के कारकत्व के लिए ये एकदम सटीक बैठती है|
सूर्य सौरमंडल का केंद्रबिंदु है जिसके चारों और बाकी समस्त ग्रह प्रदक्षिणा करते रहते हैं| सूर्य ग्रहों को वो केंद्राभिमुख बल (centripetal force) प्रदान करता है जिससे ग्रहों का अपकेंद्री बल – जो ग्रहों के प्रदक्षिणा के कारण बनता है – (centrifugal force) वो संतुलित होता है और ग्रह अपनी धुरी पर स्थित रहते हैं|
ज्योतिष में हर ग्रह का अपना
- कारकत्व है (पिता, माता, भात्र आदि)
- लिंग है (स्त्री, पुरुष, नपुंसक)
- प्रकृति है (राजसिक, सात्विक, तामसिक)
- स्वभाव है (उग्र, सौम्य आदि)
- जाती है (ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि)
- दिशा है (पूर्व, पश्चिम आदि)
- मानव शरीर के विभिन्न अंगों का स्वामित्व है
ग्रहों के उपरोक्त चीजों का हमारे जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है| यह ग्रह किस भाव में स्थित होकर जीवन के किस पहलू को किस तरह प्रभावित करेंगे, वो उपरोक्त से जाना जाता है|
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Navagraha Sun से कुडंली में क्या देखा जाता है?
- आत्मा
- अहम (ego)
- पिता
- राजा
- सरकार
- राजकीयता
- आग व बिजली
- राजनीति
- दवा
- दांई आँख
- छठे घर में दासता (servitude)
- दशम भाव से संबधित होने पर व्यवसाय
- स्वास्थ्य
- तेज, हिम्मत
- अधिकार
- नाम यश
- पूजा के स्थल
- रक्त संचार
- व्यवसाय
- पैत्रिक उत्तराधिकार
Navagraha Sun को हालाँकि ज्योतिष में क्रूर ग्रह माना गया है पर वास्तव में सूर्य एक शुभ ग्रह हैं| कुडंली में एक अनुकूल Navagraha Sun प्राणशक्ति, सहनशक्ति और immunity प्रदान करते हैं| दुनियादारी में सफलता, will power, धन सम्पति, सौभाग्य, ज्ञान, महत्वाकांक्षा, धार्मिकता आदि सब सूर्य प्रदान करेने में सक्षम हैं|
Navagraha Sun शारीरिक रूप से दिमाग (मानव नियंत्रण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू) तथा दिल (जीवन निर्वाह का सबसे महत्वपूर्ण पहलू) और हड्डीयों का (शारीरिक सरंचना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू) स्वामित्व करते हैं|
Navagraha Sun सौरमंडल के बाकी समस्त ग्रहों के कक्षा का नियंत्रण करते हैं इसलिए अधिकार एवं सत्ताधारी लोगों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं| जो भी चीज़ नियंत्रित करने वाली है वो सूर्य है| राजसिक, आधिकारिक, प्रबल, dominant, दिशा निर्धारक एवं पिता समान आदि सब गुण सूर्य के हैं|
नवग्रह सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं, कालपुरुष राशीचक्र (Natural Zodiac) में पंचमेश हैं और सिंह राशि में 0 – 20 डिग्री इनकी मूलत्रिकोण राशि है| मूलत्रिकोण राशी में ग्रह बहुत अधिक शुभ हो जाते हैं इसीलिए मूलत्रिकोण में ग्रह को देखने का महत्व है|
सूर्य मेष राशि में 0 – 10 डिग्री तक उच्च के तथा तुला याशी में 0-10 डिग्री में नीच के होते हैं| उच्च स्थिति में ग्रह सबसे बलवान और नीच स्थिति में बलहीन माने जाते हैं इसीलिए इन अवस्थाओं को देखने का भी बड़ा महत्व है|
सूर्य पुरुष ग्रह हैं, सात्विक प्रकृति के हैं, उग्र स्वभाव के हैं, क्षत्रिय जाति के हैं, पूर्व दिशा के हैं और इनके अधिदेव शिव/रूद्र हैं |चन्द्र, मंगल एवं ब्रहस्पतिअ इनके मित्र हैं, शुक्र शनि शत्रु और बुध से ये सम भाव रखते हैं|
आकृति में ये वर्गाकार हैं, हल्के घुंघराले बाल, आकर्षक एवं गर्मजोश, अच्छी बुद्धि, प्रभावशाली आवाज़, मध्यम कद, लाल आँखे, सुर्ख लाल वर्ण एवं मजबूत काठी के सूर्य पित्त प्रक्रति वाले दृढ स्वभावि और केसरी पोशाक धारी हैं|
इस वर्णन का मतलब ये नहीं की इस ग्रह से प्रभावित जातक ऐसे ही होंगे, overall ऐसी personality होगी तथा साथ ही लग्न, लग्न में बैठे या लग्न को दृष्टि देने वाले ग्रह, लग्न का नक्षत्र आदि अन्य चीजें मिलकर ही पूरी personality तय करती है|

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