
Navagrah – हिन्दू ज्योतिष के अनुसार नवग्रह या सौरमंडल के 9 ग्रह धरती पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं|खगोल विज्ञान या Astronomy के द्वारा ये तो हम जानते ही हैं की तकरीबन तीन लाख अस्सी हजार किलोमीटर दूरी पर स्थित चंद्रमा हमारी पृथ्वी के समुद्र के जल को आकर्षित कर ज्वार भाटे का कारण बनता है|
तो क्या ये चंद्रमा हम पर – मानव जीवन पर (जो 70% जल है!) कोई असर नहीं डालेगा? ये भी fact है की 149.6 करोड़ किलोमीटर दूरी पर स्थित सूर्य हमारी पृथ्वी पर जीवन और उर्जा का कारक है !
करोड़ों और लाखों किलोमीटरों की दूरी से ये खगोलीय पिंड पृथ्वी को इतना ज्यादा प्रभावित कर सकते हैं तो स्वाभाविक है की हमारे जीवन पर भी अपने प्रभाव डालेंगे|
इन खगोलीय पिंडों की दूरी जब नाप ली गयी है तो इन तथ्यों को तो आज हम बड़ी जल्दी मान लेते हैं क्यूंकि विज्ञान ने इसकी पुष्टि कर दी है| जब हम ज्योतिषीय ग्रहों के मानव जीवन पर effect की बात करते हैं तो हम थोडा संशयी हो जाते हैं, क्यों? क्योंकि तथाकथित विज्ञानं ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है!!
पर ये विडम्बना देखिये की जिन Astronomical data को आज हमारा science आधुनिक और परिष्कृत खगोलीय उपकरणों की मदद से निकाल कर ला रहा है, वो data हमारे प्राचीन प्राचीन भारत के ऋषियों, मुनियों और योगियों ने अपनी आध्यात्मिक तपस्या, योग साधना और तप के माध्यम से already दस्तावेज कर रखा है| ये data हमारे शास्त्रों और पुराणों में उपलब्ध है जो कोई भी देख सकता है|
वास्तव में अंग्रेजी का शब्द PLANET ग्रहों के सम्बन्ध में loose translation है| संस्कृत में ग्रह को “सः ग्रहयते सः ग्रहः” से जाना जाता है यानी “That which influences” – वो जो प्रभावित करे| ये मानव जीवन को प्रभावित करने वाले हमारे सौरमंडल के नौ ग्रह हैं जिन्हें नवग्रह (navagrah) कहा जाता है|

नवग्रहों (navagrah) में सात मुख्य ग्रह हैं सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, ब्रहस्पति, शुक्र एवं शनि | इसके आलावा राहू और केतु, दो छाया ग्रह या अप्रकाशित ग्रह हैं|
राहू केतु को छाया ग्रह या अप्रकाशित ग्रह इसलिए कहा गया है क्यूंकि इनकी कोई physical entity नहीं है बल्कि ये चन्द्रमा के उत्तरी व दक्षिणी गणितीय बिंदु हैं जब चन्द्र पृथ्वी की परिक्रमा करते समय सूर्य के पथ को उत्तर व दक्षिण में क्रॉस करता है|

ज्योतिष में राहू केतु का बड़ा महत्व है क्यूंकि इनमे ही सूर्य और चन्द्र को ग्रहण लगाने की शंक्ति है| ये दो छाया ग्रह और सात मुख्य ग्रह मिलकर नवग्रह कहलाते हैं|
धरती पर हम सब किसी दिन, किसी महीने, किसी वर्ष किसी खास जगह और समय में पैदा हुए| जन्म के उस समय पूर्व में कोई राशी उदय हो रही थी जो हमारी कुंडली का उदय लग्न बनी और बाकी ग्यारह राशियाँ क्रमश: anticlockwise बैठ कर हमारी जन्म कुंडली या जन्म पत्री बनती है|
जन्म के उस समय अन्तरिक्ष में नवग्रह (navagrah) जिन राशियों में विराजमान रहे हों उन्हें उसी राशियों में कुंडली में place किया जाता है|
नवग्रहों की जन्म के समय की यही placement धरती पर हमारे जीवन की दिशा निर्धारित करती है| नवग्रहों की आपस में relationship, उनकी युति, दृष्टि, उच्च व नीच की अवस्थाएं हमारे जीवन की दशा व दिशा निर्धारित करते हैं|
इन नवग्रहों को नीचे संक्षेप में विवरण किया गया है| अधिक विस्तृत और व्यक्तिगत ग्रह विश्लेषण के लिए पूरी कुंडली का अवलोकन कर के ही नवग्रहों के पूरे प्रभाव का विश्लेषण किया जा सकता है|
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