Navagraha Moon – वैदिक ज्योतिष में चन्द्र को सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है| चन्द्र पृथ्वी के निकटतम और सबसे तीव्र गतिमान ग्रह है जो सूर्य से प्रकाशित होता है| चंद्रमा हमारे मस्तिष्क और जटिल मनोवैज्ञानिक आतंरिक शक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है|
हमारी मनःस्थिति जीवन में बड़ी महत्वपूर्ण होती है क्यूंकि किस भी परिस्थिति के हर emotional response के लिए हमारी मनःस्थिति ही उत्तरदायी है| चन्द्रमा अपनी शक्ति धरती के निकटतम होने से प्राप्त करता है|
शास्त्रों के अनुसार चन्द्रमा को “चन्द्रमा मनस्सो जातः” कहा गया है जिसका मतलब है चंद्रमा कालपुरुष के मन से उत्पन्न हमारे मन का कारक है| और जीवन में किसी भी तरह की उन्नति, सफलता या प्रगति, हर चीज के लिए एक मजबूत मन का होना बहुत जरूरी है|
एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी – मन के हारे हार है मन के जीते जीत – मतलब अगर हमारे मन ने हार मान ली तो सच में हार है और अगर हमारे मन ने जीत मान ली, तो जीत है| इसीलिए चन्द्रमा मन के कारकत्व के कारण सबसे महत्वपूर्ण माना गया है| चंद्रमा के महत्व का एक और कारण है – वो है गोचर या Transit – ज्योतिष में ग्रहों के गोचर या Transit को चन्द्रमा से ही देखा जाता है|
चंद्रमा (Navagraha Moon) किन चीज़ों का प्रतिनिधित्व करता है ?
- मन
- मस्तिष्क
- माँ (Mother)
- भावनाएं
- रक्त
- जल एवं जलीय स्थान
- Petroleum उत्पाद
- समुद्रिक उत्पाद एवं Sea food
- तरल पदार्थ
- बागबानी
- बांयी आँख
- विदेश यात्रा
- मोती
- हमारी मानसिकता और भावुकता (emotions)
- हमारे emotional response
- हमारी कल्पना शक्ति
- हमारी दूसरों के प्रति support, care एवं सहानुभूति
- बांयी आँख और शरीर की वो प्रणालियाँ जो पालन पोषण और feeding का काम करती हैं, ये सब चन्द्र के अधीन हैं|
कुंडली में पीड़ित या कमजोर चन्द्रमा का क्या दुष्प्रभाव पड़ता है?
चंद्रमा (Navagraha Moon) यदि कुंडली में पीड़ित हो – यानी दुष्ट ग्रहों के साथ हो, या उनसे दृष्ट हो, नीच का हो या दुश्स्थान में स्थित हो, राहू केतु के अक्ष में हो, या ग्रहण में हो – तो इस तरह का पीड़ित चन्द्र जीवन में काफी दुष्प्रभाव दे सकता है|
चंद्रमा (Navagraha Moon) हमारे प्राणशक्ति के वेग को control करता है| कुंडली का कमजोर चन्द्र इस शक्ति को असमतल कर कई तरह की बीमारियाँ देता है| कुंडली में पीड़ित चन्द्र मानसिक चिंताएं, तनाव और हीनभावना का कारण बन मानसिक विकार देता है जबकि मजबूत चन्द्र strong thinking power देता है|
पीड़ित या कमजोर चन्द्र किस प्रकार के रोगों का कारक है ?
पीड़ित चन्द्र (Navagraha Moon) जुकाम, खांसी, बुखार, नेत्र रोग, पागलपन, लकवा, मिरगी, हिस्टीरिया, अन्त्रशूल (colic pain), आँतों के रोग, कन्ठ रोग, bronchitis, तंत्रिका रोग (neurosis), टाइफाइड और कैंसर जैसे रोग दे सकता है|
कुडंली के गहन विश्लेषण ये पता किया जा सकता है की दुष्प्रभाव किस ग्रह से या कहाँ से आ रहा है और उस प्रॉब्लम का ज्योतिष उपायों से काफी हद तक निदान किया जा सकता है|
Navagraha Moon personality – चन्द्र कुछ slim पर कुछ गोलाकार आकृति के, दिखने में आकर्षित और सुन्दर, सुन्दर आँखें, मधुर वाणी, श्वेत वर्ण, छोटे घुंघराले बाल, भेदभाव रहित बुद्धि, अधीर nature और अत्यधिक कामुक प्रवृत्ति के माने जाते हैं|
इस वर्णन का मतलब ये नहीं की इस ग्रह से प्रभावित जातक ऐसे ही होंगे, overall ऐसी personality होगी तथा साथ ही लग्न, लग्न में बैठे या लग्न को दृष्टि देने वाले ग्रह, लग्न का नक्षत्र आदि अन्य चीजें मिलकर ही पूरी personality तय करती है|
Navagraha Moon कालपुरुष राशिचक्र में चतुर्थेश होकर कर्क राशि के स्वामी हैं और वृषभ राशि में 3-30 डिग्री इनकी मूलत्रिकोण राशि है| मूलत्रिकोण राशी में ग्रह बहुत अधिक शुभ हो जाते हैं इसीलिए मूलत्रिकोण में ग्रह को देखने का महत्व है|
चन्द्र वृषभ राशि में 0-3 डिग्री में उच्च के, और वृश्चिक राशि में 0-3 डिग्री में नीच के होते हैं| उच्च स्थिति में ग्रह सबसे बलवान और नीच स्थिति में बलहीन माने जाते हैं इसीलिए इन अवस्थाओं को देखने का भी बड़ा महत्व है|
चन्द्र (Navagraha Moon) एक स्त्री राशि के, सात्विक प्रकृति के, जलीय प्रव्रत्ति के, वैश्य जाति के ग्रह है जिसकी दिशा उत्तर पश्चिम है और इनके अधिदेव माँ दुर्गा हैं| चंद्रमा के मित्रों में सूर्य व बुध आते हैं और इनका कोई शत्रु नहीं है| बाकी समस्त ग्रह चन्द्र से सम भाव (neutral ) रखते हैं|


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