
ज्योतिष के सबसे उदार, सबसे शुभ और घर परिवार एवं संतान के सुख के कारक ब्रहस्पति का रत्न है पुखराज| ब्रहस्पति सौभाग्य के, ऐश्वर्य के, संतान के, स्त्री जातक में पति के, गुरु अथवा teacher के और धर्म आदि के कारक हैं|
इतने शुभ ग्रह का रत्न तो हर कोई पहन सकता होगा? इसका उत्तर हाँ भी है और नहीं भी| साधारण cases में हाँ और पर कुछ cases में नहीं|
जैसा मैंने अपने पहलेवाले इस article में कहा था की मैं हर रत्न को हर लग्न से मिलकर बताऊँगा की कौन से लग्न को कौन सा रत्न सूट करेगा और क्यों, तो इसी series में आइये दोस्तों आज हम ब्रहस्पति ग्रह के रत्न Pukhraj की बात करते हैं की प्रत्येक लग्न का ब्रहस्पति से क्या सम्बन्ध है और Pukhraj stone धारण कर सकते हैं की नहीं|
ज्योतिष में सूर्य और चन्द्र एकाधिपति हैं मतलब एक भाव के स्वामी, पर बाकी समस्त ग्रहों के स्वामित्व में दो भाव आते हैं| सूर्य और चन्द्र चूँकि एकाधिपति हैं इसलिए इनका रत्न निर्धारण थोडा आसान हो जाता है| जब दो भावों का स्वामित्व आता है तब एक भाव शुभ और दूसरा अशुभ हो तो रत्न निर्धारण में काफी सावधानियां लेनी पड़ती है|
मेष लग्न और Yellow sapphire ring
राशी चक्र की पहली राशी है मेष है जो मंगल के स्वामित्व की पहली राशी है| मेष राशी के लग्न में ब्रहस्पति के स्वामित्व में नौवां और बारहवां भाव आएगा| मेष लग्न में ब्रहस्पति के स्वामित्व का एक भाव शुभ नवम भाव है और दूसरा अशुभ भाव| पर देश काल पात्र के बदलाव में आजकल के दृष्टिकोण से बारहवां भाव neutral – सम भाव और बहुधा cases में शुभ ही माना जाता है|
मेष लग्न के लग्नेश मंगल और ब्रहस्पति परस्पर मित्र ग्रह हैं| इस लग्न में Yellow sapphire ring शुभ फल देगा| Pukhraj धारण धार्मिक प्रवृत्ति, अच्छा सौभाग्य, उन्नति एवं ऐश्वर्य, intelligence, नाम यश और परोपकारी तथा दानशील प्रकृति देगा|
वृषभ लग्न और Pukhraj gemstone
राशी चक्र की दूसरी राशी है वृषभ, जो शुक्र के स्वामित्व की पहली राशी है| ब्रहस्पति के स्वामित्व में यहाँ आठवां और ग्यारहवां भाव होगा| आठवां भाव कुंडली का सबसे बड़ा दुषस्थान है और ग्यारहवां भाव लाभ भाव होते हुए अच्छा भाव है|
वृषभ लग्न के स्वामी शुक्र ब्रहस्पति से सम भाव (neutral) रखते हैं पर ब्रहस्पति शुक्र को शत्रु मानते हैं| वृषभ लग्न में ब्रहस्पति की महादशा या अन्तर्दशा में Yellow sapphire ring पहन सकते हैं| इस लग्न में विशेषकर अगर कोई पैत्रिक संपत्ति का मामला उलझा है तो Pukhraj पहनना फायदेमंद होगा|
Yellow sapphire और मिथुन लग्न
अब बात करते हैं मिथुन लग्न की जो बुध की राशी है| मिथुन लग्न में ब्रहस्पति के स्वामित्व में सप्तम और दशम भाव आते हैं| यहाँ दोनों भाव तो शुभ हैं पर मिथुन के case में ब्रहस्पति बुध के शत्रु ग्रह हैं|
मिथुन लग्न में पुखराज सिर्फ तभी पहन सकते हैं जब ब्रहस्पति इन्ही भावों में स्थित हों| स्वग्रही होकर ब्रहस्पति अपनी महादशा और अंतर दशा में पुखराज के शुभ फल देगा|
कर्क लग्न और Yellow sapphire ring
राशी चक्र की चतुर्थ राशी कर्क राशी है जो चन्द्र की राशी है| कर्क लग्न में ब्रहस्पति को छठे और नवें भाव का स्वामित्व मिलता है| चंद्रमा और ब्रहस्पति परस्पर मित्र ग्रह हैं और यदि ये दोनों ग्रह एक साथ हों या परस्पर दृष्ट हों तो शुभ गजकेसरी योग बनाते हैं|
कर्क लग्न में ब्रहस्पति के स्वामित्व में एक भाव अशुभ छठा भाव है और दूसरा शुभ नौवां| पर अशुभ होते हुए भी ब्रहस्पति का स्वामित्व छठे भाव को शुभता देता है और इस case में पुखराज पहनना शुभ है| नाम, ऐश्वर्य, सौभाग्य, अच्छी संतान और धार्मिक प्रवृत्ति आदि सब पुखराज पहनने से उपलब्ध होती है| ब्रहस्पति की महा एवं अंतर दशाओं में विशेष रूप से Yellow sapphire ring अति शुभ फल देता है|
सिंह लग्न और Pukhraj stone
अब बात करते हैं सूर्य की राशी सिंह की| सिंह लग्न में ब्रहस्पति शुभ त्रिकोण पंचम भाव तथा अशुभ भाव अष्टम के स्वामी बनते हैं| पंचम भाव अति महत्वपूर्ण शुभ त्रिकोण भाव है पर अष्टम दुश्स्थान है| यदि ब्रहस्पति कुंडली में पीड़ित नहीं है तो Yellow sapphire ring से अष्टम के भी अच्छे फल ही प्राप्त होंगे|
सिंह लग्न के स्वामी सूर्य और ब्रहस्पति परस्पर मित्र हैं, पुखराज धारण इस case में शुभ फल देगा, विशेषतः ब्रहस्पति की महा और अंतर दशाओं में| और अगर इस लग्न के जातक पुखराज के साथ ही माणिक भी पहनें तो अति उत्तम रहेगा|
कन्या लग्न और Yellow sapphire ring
राशीमंडल की छठी राशी है कन्या राशी जो बुध के स्वामित्व की दूसरी राशी है| कन्या लग्न में ब्रहस्पति के स्वामित्व में चतुर्थ और सप्तम भाव आएगा| यहाँ दोनों भाव तो शुभ हैं पर कन्या लग्न के case में ब्रहस्पति बुध के शत्रु ग्रह हैं|
इस लग्न में ब्रहस्पति की महादशा या अंतरदशा में पुखराज पहना जा सकता है विशेषकर यदि ब्रहस्पति चतुर्थ भाव में ही स्थित हों तो पुखराज अच्छे फल देगा|
तुला लग्न और Pukhraj stone
राशि चक्र की सातवीं राशी तुला है| तुला शुक्र के स्वामित्व की दूसरी राशि है| यहाँ ब्रहस्पति के स्वामित्व में तीसरा भाव और छठा भाव आएगा| तुला लग्न के स्वामी शुक्र ब्रहस्पति से सम भाव (neutral) रखते हैं पर ब्रहस्पति शुक्र से शत्रुता रखते हैं|
तुला लग्न में ब्रहस्पति के स्वामित्व के दोनों भाव अशुभ हैं और रत्न स्वामी लग्नेश से शत्रु भाव रखते हैं| इस case में यदि ब्रहस्पति इन दोनों में किसी भाव में स्थित हों तो स्वग्रही होंगे और उस case में ब्रहस्पति की महादशा या अंतर दशा में पुखराज पहना जा सकता है, अथवा नहीं|
वैसे मेरे personal अनुभव में तुला लग्न वालों को Yellow sapphire ring नहीं पहनना चाहिये|
वृश्चिक लग्न और Yellow sapphire
अगली राशी है वृश्चिक जो राशीमंडल की आठवीं राशी और मंगल की दूसरी राशी है| इस लग्न में ब्रहस्पति के स्वामित्व में दूसरा और पांचवां भाव आएगा| इस लग्न के लग्नेश मंगल और ब्रहस्पति परस्पर मित्र ग्रह हैं और भाव स्वामित्व शुभ है|
वृश्चिक लग्न में पुखराज धारण बहुत अच्छे फल देगा| ब्रहस्पति की महादशा और अंतर दशाओं में जीवन के हर क्षेत्र में ये रत्न शुभ फल देगा और overall उन्नति करेगा| क्यूंकि वृश्चिक राशी कालपुरुष की अष्टम राशी है, इसीलिए बुजुर्ग जातक Yellow sapphire ring को पहले टेस्ट करलें की यहे उन्हें suit करेगा की नहीं, फिर धारण करें|
धनु लग्न और yellow sapphire gemstone
वृश्चिक के बाद आती है धनु राशी जो राशिचक्र की नौवीं राशी है| धनु ब्रहस्पति के अपने ही स्वामित्व की पहली राशी है| धनु लग्न में ब्रहस्पति खुद लग्नेश हैं और चतुर्थ भाव के भी स्वामी हैं|
धनु लग्न के जातक के लिए पुखराज जीवन पर्यंत का रत्न है| Yellow sapphire is life stone for Sagittarius ascendant. सर्व सौभाग्य, दीर्घ कालीन सुख और दीर्घायु के लिए धनु के जातक Yellow sapphire ring अवश्य पहनें| रोज सुबह उठते ही पुखराज रत्न दर्शन और रत्न ध्यान (stone meditation) से दिन शुरू करें, overall उन्नति और तरक्की मिलेगी|
मकर लग्न और Pukhraj
अगली राशी है मकर जो कर्माधिपति शनि के स्वामित्व की पहली राशी और राशी चक्र की दशम राशी है| ब्रहस्पति इस लग्न में तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी बनते हैं| लग्नेश शनि और ब्रहस्पति परस्पर सम भाव (neutral) रखते हैं|
इस case में ब्रहस्पति के स्वामित्व में दोनों भाव उतने अच्छे नहीं हैं, हालाँकि आधुनिक युग में बारहवां भाव neutral भाव ही माना जाता है| मकर लग्न में यदि ब्रहस्पति तीसरे या बारहवें भाव में स्वग्रही हों तो महादशा या अन्तर्दशा में पुखराज पहन सकते हैं|
कुम्भ लग्न और Pukhraj ratna
शनि के स्वामित्व की अगली राशी है कुम्भ राशी जो राशी चक्र की ग्यारहवीं राशी है| ब्रहस्पति यहाँ दुसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं| लग्नेश शनि और ब्रहस्पति परस्पर सम भाव (neutral) रखते हैं|
इस case में ब्रहस्पति के स्वामित्व के दोनों भाव धन से जुड़े हैं, एक धन भाव है और दूसरा लाभ भाव| यदि कुंडली में ब्रहस्पति पीड़ित नहीं है तो कुम्भ लग्न में पुखराज पहना जा सकता है| ग्यारहवां भाव उपचय यानी growth का भाव है इसलिए यदि ब्रहस्पति पीड़ित होगा तो affliction भी बढेगा|
मीन लग्न और पुखराज रत्न
राशी चक्र की आखिरी राशी यानी बारहवां भाव है मीन राशी जो ब्रहस्पति के स्वामित्व की अपनी दूसरी राशी है| यहाँ ब्रहस्पति लग्नेश हैं और साथ ही दशमेश यानी दशम भाव के भी स्वामी हैं|
धनु लग्न के जातक के लिए पुखराज जीवन पर्यंत का रत्न है| Yellow sapphire is life stone for Sagittarius ascendant. सर्व सौभाग्य, दीर्घ कालीन सुख और दीर्घायु के लिए धनु के जातक Yellow sapphire ring अवश्य पहनें| ब्रहस्पति की महा दशा और अंतर दशा में तो पुखराज अवश्य पहनें, उत्तम फल मिलेंगे|

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