
Pitru Paksha यानी Mahalaya 2017 इस वर्ष 5 सितम्बर 2017 से शुरू हो कर 19 सितम्बर 2017 को समाप्त होंगे| शास्त्रों के अनुसार ये वो समय है जब हमारे पितृगण पृथ्वी पर अपने वंशजों से तर्पण की इच्छा ले कर आते हैं|
ब्रह्म वैवर्त पुराण में कहा गया है की देवताओं से भी पहले अपने पितरों को प्रसन्न किया जाना चाहिए| ज्योतिष में पितृ दोष को एक कठिन दोष माना गया है जिसके चलते जातक को जीवन में उन्नति नहीं मिलती| इन्हीं दोषों के निवारण के लिए हर वर्ष की भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अश्विन की कृष्ण अमावस्या को Mahalaya या Pitru paksha में तर्पण किया जाता है|
Shradh पंद्रह दिनों का वो सुअवसर है जब हम amavasya tharpanam कर अपने पितरों को तृप्त कर उनसे जीवन के खुशियाँ आशीर्वाद के रूप में प्राप्त कर सकते हैं| जो कर्म हमें इस जन्म में स्वास्थ्य, धन, career और रिश्तों आदि में प्रतिकूल असर डाल रहे हैं, उन्हें महालय पक्ष में तर्पण के द्वारा शांत किया जा सकता है| पितरों के आशीर्वाद और कृपा के बिना जीवन में उन्नति हासिल नहीं की जा सकती|
Shradh के और क्या महत्व हैं, पितृ कौन हैं, यहाँ पढ़िए|
कैसे करें Mahalaya 2017 का श्राद्ध?
गरुड़ पुराण के अनुसार:
कर्मनिष्ठास्तपोनिष्ठाः पञ्चाग्निब्रह्मचारिणः| पितृ मातृ पराश्चैव ब्राह्मणाः श्राद्धदेवताः|| – गरुड़ पुराण, अध्याय 99, ||5||
धार्मिक अनुष्ठानों को कर्तव्य निष्ठा से करने कराने वाले, पवित्र पंचाग्नि धारक, माता पिता के सेवानिष्ठ और ब्राह्मण धर्म पूरी तरह से निभाने वाले योग्य ब्राह्मण की श्राद्ध देवता हैं|
उपरोक्त के अनुसार किसी कर्म कांडी ब्राहमण या पुरोहित के द्वारा ही श्राद्ध कर्म किया जा सकता है| पर आज के भाग दौड़ के जीवन में समय के आभाव के कारण या ऐसे ब्राह्मणों/पुरोहितों के ना मिलने के कारण शायद हर एक के लिये इतना detailed कर्म काण्ड possible ना हो| पर इसका मतलब ये नहीं की आप अपने पितरों का तर्पण ना कर सकें|
जिस युग हम जी रहें हैं वो कलियुग के साथ नामयुग भी है| इस युग में कर्म काण्ड से ज्यादा भाव महत्वपूर्ण है| शास्त्र ये भी कहते हैं की सिर्फ नामजप से कलियुग में मुक्ति पायी जा सकती है| इस युग में भाव से आप जो कर्म करेंगे वो पूरी तरह स्वीकार्य है| पितृ तर्पण भी आप खुद कर सकते हैं| आइये आज पितृ तर्पण का एक सरल तरीका समझते हैं जो स्त्री या पुरुष कोई भी अपने पितरों के लिये कर सकता है|
Mahalaya 2017 में स्वयं सरल तर्पण कैसे करें?
पितृ तर्पण की बहुत ही सरल और बहुत ही प्रभावशाली पद्धति आप मेरे इस article पर पढ़ कर अपने घर पर स्वयं तर्पण कर सकते हैं|
Tarpanam in Hindi – पितृ तर्पण स्वयं करें
Mahalaya 2017 में विभिन्न श्राद्ध
इस महालय पक्ष में 5 सितम्बर जो मंगलवार है, उस दिन Purnima Shraddha से लेकर 19 सितम्बर मंगलवार जो Sarva Pitru Amavasyaहै, तक ये पक्ष रहेगा| साधारणतया सभी दिन 12:45 से लेकर 15:45 तक सर्वसाधारण मुहूर्त है shradh का|
उपरोक्त श्राद्ध के दिनों में सबसे महत्वपूर्ण श्राद्ध सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध है| वो इसलिए की अगर श्राद्ध के सब दिन भी miss हो जायें, तो भी अमावस्या श्राद्ध के दिन सर्व पितृ मोक्ष श्राद्ध करके अपने जीवन को कृतार्थ कर सकते हैं| अमावस्या श्राद्ध के लावा के दिनों में जिस तिथि को जिस पूर्वज की मृत्यु हुई है और वो ज्ञात है तो उस उस तिथि को उन पूर्वजों का श्राद्ध होता है| पर अमावस्या श्राद्ध को समस्त जाने अनजाने पूर्वजों का श्राद्ध किया जा सकता है|
इस दिन पूरे भाव से श्राद्ध करें और अपने पितरों की आत्मा ही नहीं, बल्कि जितने भी पूर्वजन्मों के आपके रिश्ते रहे हैं, दोस्त रहे हैं और पालतू जानवर, मवेशी आदि रहे हैं, सबकी आत्मा तृप्त होगी|
अमावस्या श्राद्ध के बाद गौमाता को चारा देना, कौवों को खाना डालना और छोटे प्राणियों जैसे चींटी आदि को खाना डालना अति शुभ माना गया है| मान्यता है की श्राद्ध ग्रहण करने के लिए पितर कोए का रूप लेकर दोपहर के समय हमारे घर आते हैं और तर्पण ग्रहण कर संतुष्ट होकर जाते है| इस दिन आप poor feeding, अनाथ आश्रम में दान आदि भी करें तो अति शुभ है| इस प्रकार की क्रिया आपके पूर्वजों से आपको आशीर्वाद में सहायक होंगी|

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