ज्योतिष के सबसे उदार और शुभ ग्रह (जिन्हें देवगुरु भी कहा जाता है) ब्रहस्पति या गुरु अभी आने वाले समय में Guru transit 2022 के दौरान वक्री होकर गोचर करेंगे। देव गुरु ब्रहस्पति ज्योतिष मंडल के सबसे विशालकाय और भीमकाय ग्रह हैं। कुंडली में जो भी इनका भाव स्वामित्व है, उसके अनुसार जो फल देते हैं, उसमे विस्तार देते हैं, वृद्धि देते हैं। ज्योतिष में इन्हें ऐश्वर्य, संतान, समृद्धि, ज्ञान, अध्यात्म, विद्या आदि का कारक माना गया है। जीवन में समृद्धि, ऐश्वर्य, दाम्पत्य, अच्छी संतान, अध्यात्म के क्षेत्र में उन्नति, गुरु की प्राप्ति, धर्म कर्म आदि के लिए ब्रहस्पति के आशीर्वाद की जरुरत रहती है। कालपुरुष कुंडली में ब्रहस्पति नवें भाव – धर्म भाव एवं बारहवें भाव – मुक्ति भाव के स्वामी हैं।
ज्योतिष मंडल में ग्रह सदा चलायमान रहते हैं और जब वे पृथ्वी के बहुत निकट गोचर करते हैं तब वक्री चाल (जिसे Retrograde motion भी कहा जाता है) में चलते हुए प्रतीत होते हैं। वास्तव में पृथ्वी से देखते समय वक्री ग्रह अग्रिम राशी से पिछली राशी में दिखते हैं जिसके कारण इन्वहें क्री ग्रह कहा जाता है। Retrograde motion का मतलब है उलटी चाल – पीछे जाना। पर वक्री का मतलब पीछे तो जाना ही, पर पीछे के साथ किसी भी दिशा में, किसी भी डायरेक्शन में जाना। पूरा 360 degree घूम जाना। वक्री ग्रह पृथ्वी के समीप होने की वजह से हम पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालता है। और ये Guru transit 2022 का गोचर कुंडली में ब्रहस्पति की स्थिति को activate करता है। गुरु जब वक्री होगा तो उसके चेष्टा बल में वृद्धि होगी और वह अपने फलों में विस्तार देगा।
Guru transit 2022 में इस समय ब्रहस्पति मीन राशी में मार्गी होकर गोचर कर रहे हैं। 29 जुलाई 2022 को Guru transit 2022 में ब्रहस्पति वक्री होकर गोचर करेंगे। ये गोचर 119 दिन (4 महीने) चलेगा और देवगुरु ब्रहस्पति 24 नवम्बर 2022 में फिर मार्गी होकर गोचर करेंगे। इस Guru transit 2022 में अच्छी बात ये है की गुरु मीन राशी में ही रहेंगे।
ये गोचर कुछ कुछ राशियों के लिए शुभ गोचर, कुछ के लिए मध्यम और कुछ के लिए ज्यादा अच्छी नहीं रहने वाली। Actually किसी भी गोचर का फलादेश साधारण तरीके से यूँही नहीं किया जा सकता। आपकी कुंडली में उस ग्रह की क्या स्थिति है, भाव स्वामित्व क्या है, किस ग्रह के साथ युति या दृष्टि है, दशा pattern क्या चल रहा है – आदि कई पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करके ही सही एवं सार्थक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। उपरोक्त तरीके से सही फलादेश होता है, एक general तरीके से किया गया फलादेश अँधेरे में तीर चलाने जैसा है।
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