Navratr 2016 तीसरा दिन 03 अक्टूबर सोमवार – माँ ब्रह्मचारिणी पूजा|
Navratr 2016 Dwitiya puja में द्वितीया तिथि 03 अक्टूबर सोमवार को 10:05 तक रहेगी|
माँ ब्रह्मचारिणी स्वरुप – श्वेत वस्त्र धारण किये, पैरों में बिना किसी पादुका के, बिना वाहन के पैदल, दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमण्डल लिए, सौम्य शांत अति सुन्दर और अद्भुत रूप है इस अवतार में माँ आद्य शक्ति का|
माँ ब्रह्मचारिणी का दिव्य चरित्र
ब्रह्मचारिणी दो शब्दों से बना है – ब्रह्म + चारिणी| शास्त्र कहते हैं – वेदस्तत्वं तपो बहमः – अर्थात वेद, तत्व और तप ‘ब्रह्म’ शब्द के अर्थ हैं| तो शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मचारिणी शब्द का अर्थ है – तपस्या की चारिणी मतलब तप का आचरण करने वाली| शिव को पुनः प्राप्त करने के लिये माँ जगदम्बे ने जब हिमालय पर्वतराज हिमवान के घर जन्म लिया तब नारदजी के उपदेश से इन्होने भगवान शंकर की प्राप्ति के लिए बहुत कठिन तपस्या करी|
कई हजारों वर्ष कंद मूल खाकर, फिर कई वर्ष शाक पर, खुले आकाश के नीचे वर्षा, धूप और आंधी सहते हुए और फिर कई हजारों वर्ष सिर्फ टूटे हुए बिल्व पत्रों पर निर्वाह कर देवी ने दुष्कर तपस्या करी और फलस्वरूप भगवान् शंकर की अर्धांगिनी बनीं|
माँ का ये दिव्य स्वरुप की उपासना से भक्तों के मन में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है| जीवन के कठिनतम समय में भी मन कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता| Navratr 2016 Dwitiya puja के इस दिन उपासक का मन “स्वाधिष्ठान चक्र” में स्थित होता है|
ज्योतिष से सम्बन्ध – ऐसी मान्यता है की मंगल ग्रह माँ ब्रह्मचारिणी से शासित हैं और Navratr 2016 Dwitiya puja के दिन आदि शक्ति के इस रूप की पूजा अर्चना आराधना करने से कुंडली में मंगल के दुष्प्रभाव का निवारण होता है और मंगल सब प्रकार के ऐश्वर्य साधक को प्रदान करते हैं| Navratr 2016 Dwitiya puja के इस दिन का निर्धारित रंग सफ़ेद है और देवी का पसंदीदा पुष्प है चमेली या Jasmine.
Navratr 2016 Dwitiya puja के तीसरे दिन (द्वितीय तिथि) माँ ब्रह्चारिणी पूजा के मन्त्र
वैसे तो देवी महात्यम में, शिवपुराण और शास्त्रों में बहुत से मन्त्र और स्तोत्र हैं पर जैसा की मैं कहता आया हूँ आजकल के इस भाग दौड़ की जिन्दगी में, जहाँ हम लोग समय के पीछे भागते रहते हैं – बहुत लम्बे जाप के लिये समय निकालना मुश्किल हो जाता है| दूसरी अड़चन आती है संस्कृत के उच्चारण की, तो बड़े बड़े स्तोत्र संस्कृत में सही उच्चारण में भाग दौड़ के इस जीवन में पढना मुश्किल हो जाता है| विकल्प है किसी पंडित या पुरोहित से पूजा करवा लें – ये भी आसान नहीं – इन दिनों में एक तो पंडित मिलते ही नहीं और मिलें भी तो उनकी अपेक्षा के क्या कहने !! तो क्या करें?
इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए मैं आज आपको Navratr 2016 Dwitiya puja के लिए ब्रह्मचारिणी पूजा के कुछ छोटे, आसान पर बहुत ही प्रभावशाली मन्त्र दे रहा हूँ जिसका बताई गयी संख्या में जाप करें और पूजा संपन्न करें|
माँ भगवती का पंचोपचार पूजन करें और Navratr 2016 Dwitiya puja में माँ ब्रह्मचारिणी के ऊपर बताये गए रूप का ध्यान करें| अब नौ बार निम्न मंत्र का उच्चारण करें:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः|| (Om Devi brahamchaarinyai namah)
इसके बाद निम्न मन्त्र का तीन उच्चारण करें:
वन्दे वाञ्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम| जपमाला कमण्डलू धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्||
(Vande vaanchhit laabhaay chandraardh krit shekharaam japmaalaa kamandalu dharaa brahmcharini shubhaam)
फिर निम्न मंत्र का भी तीन उच्चारण करें:
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा||
(dadhaanaa kar padmaabhya-makshmaalaa kamandalu devi prasidatu mayi brahmchaarinya-nuttamaa)
अब नौ बार निम्न मंत्र पढ़ें:
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः||
(Yaa devi sarva bhooteshu maa brahmcharini roopen samsthita namastasyai namastasyai namastasyai namo namah)
पूजा के अंत में जाने अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें:
आवाहनम न जानामि न जानामि विसर्जनम| पूजाम चैव ना जानामि क्षम्यताम परमेश्वरी|| मंत्रहीनम क्रियाहीनम भक्तिहीनम सुरेश्वरी| यत्पूजितम मया देवी परिपूर्ण तदस्तु में ||
मंत्र बोलने में कठिनाई हो तो भाव से क्षमा प्रार्थना करें की हे माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण आद्य शक्ति, हे जगत जननी माँ दुर्गा परमेश्वरी, जाने अनजाने में अगर मुझसे कोई गलती हो गयी हो मुझे क्षमा करें, मेरी पूजा स्वीकार कर मुझे कृतार्थ करें| मुझ पर और मेरे परिवार पर सदा कृपा दृष्टि रखें|
जैसा मैं अपने हर article में कहता हूँ – पूजा या किसी भी भगवत सेवा में भाव सबसे महत्वपूर्ण है, भाव से की जाने वाली पूजा ही देव को सबसे ज्यादा प्रिय है| पूरे मन से, भाव से और विश्वास से माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना आराधना करें, अपने मङ्गल को अनुकूल बनायें और जीवन में उन्नति करें| जय माता दी|

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