Kaal Sarp dosh in Hindi – कालसर्प दोष क्या है ? प्रत्येक जातक की कुंडली को राहू और केतु १८० डिग्री पर किसी न किसी भाव में विच्छेदन करते हैं| राहू और केतु की भावों में उपस्थिति अनुकूल कम और प्रतिकूल ज्यादा देखी गयी है| कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में समस्त ग्रह राहू से लेकर केतु के मध्य में आते हैं|
वास्तव में राहू और केतु हैं क्या ? हर कुंडली में राहू और केतु की उपस्थिति रहती है क्यूंकि ज्योतिष के नवग्रह में ये दो छाया ग्रह हैं तो हर कुंडली में इनकी उपस्थिति अनिवार्य है| राहू और केतु को छाया ग्रह इसलिए कहा गया है की वास्तव में ये खगोलीय पिंड रूप में न होकर चंद्रमा के दो गणितीय बिंदु हैं| चन्द्रमा जब अपनी धुरी पर पृथ्वी की प्रदक्षिणा में सूर्य के पथ को (ecliptic) को उत्तर और दक्षिण में १८० डिग्री पर काटता है तो इन बिन्दुओं हो राहू और केतु कहा गया है| नीचे दिए diagram में इसे अच्छी तरह समझ सकते हैं|

कालसर्प दोष (Kaal Sarp dosh) जातक के जीवन में बहुत अधिक संघर्ष का कारण बनता हैं| इस दोष के चलते उन्नति में, व्यवसाय में, परिवार में कहीं पर भी सफलता नहीं मिलती| जीवन के महत्वपूर्ण २८-३२ वर्ष के मध्य कालसर्प दोष (Kaal Sarp dosh) का अत्यधिक प्रतिकूल असर देखा गया है| इस दोष के कई रूप हैं जो इस पर depend करते हैं की किन भावों के मध्य ये दोष बन रहा है ध्यान करने की सबसे important चीज यह है की कोई भी ग्रह, एक भी ग्रह अगर राहू और केतु से बाहर हुआ तो ये दोष नहीं बनता|
काल सर्प दोष (Kaal Sarp dosh) क्या वास्तव में होता है?
वैसे एक बात यहाँ clear कर दूं की वैदिक ज्योतिष के किसी भी classics में, किसी भी ग्रन्थ में चाहे ब्रहद पराशरा होरा शास्त्र हो, जैमिनीसूत्रम हो, बृहत जातकम हो, उत्तर कालामित्र हो, जातक पारिजात हो या अन्य किसी भी प्राचीन ज्योतिष ग्रन्थ जहाँ से इस विद्या का प्रादुर्भाव हुआ है – कहीं भी कालसर्प दोष (Kaal Sarp dosh) या योग का कोई उल्लेख नहीं है !! आधुनिक ज्योतिष ग्रन्थ जैसे जातकतत्व में भी ऐसे किसी दोष का वर्णन नहीं है | हमारे ज़माने के महान ज्योतिषविद, गहन शोधकर्ता और आधुनिक ज्योतिष के कुछ अभूतपूर्व कृतियों में निर्माणकर्ता श्री. के. एन. राव भी कालसर्प दोष (Kaal Sarp dosh) को नहीं मानते !!
तो सोचने की बात ये है की जब ज्योतिष के सिधान्तों में ही कालसर्प दोष (Kaal Sarp dosh) का जिक्र नहीं है तो यह आया कहाँ से ?
ज्योतिष की एक और पद्धति है – लाल किताब| ये वैदिक ज्योतिष की पद्धति नहीं है| इस पद्धति में कालसर्प दोष और इसके उपाय दिए गए है जहां से उठा कर इसे इतना प्रशस्त कर दिया गया है की आज ये discussion और उपायों का hot issue बन गया है| जितना भी समझाएं, लोग बहकावे में आ जाते हैं| बहरहाल अगर किसी भी पद्धति में ऐसा जिक्र है तो इसे पूरी तरह नाकारा भी नहीं जा सकता, तो इसे समझते हुए मैं ऐसा उपाय देता हूँ जो राहू और केतु को शांत करें नाकि आपके bank balance को अशांत करे !!
सिर्फ ज्यादा ग्रहों की उपस्थिति या केतु से राहू के मध्य ग्रहों की उपस्थिति को भी आजकल business के point of view से कालसर्प दोष का नाम दे दिया जाता है जबकि ऐसा है नहीं| उपायों को ग्रहों की शांति के लिए न बना कर business के लिए बना कर अनजान लोगों को भय दिखा कर आजकल कई बार इसे धन कमाने का जरिया बना दिया जाता है| अगर सम्पूर्ण कालसर्प दोष कुंडली में बनता है तो जातक की भावना, सोच और psychology एवं belief system के अधार पर इसका सफल निवारण हो सकता है|
काल सर्प दोष (Kaal Sarp dosh) का निवारण कैसे हो ?
जब मैं ये कहता हूँ की जातक की सोच और psychology एवं belief system के अधार पर तो इसका मतलब है की अगर जातक में भक्ति और सम्पूर्ण समपर्ण भाव है तो जप और तप का उपाय सबसे effective होगा जैसे की कालभैरवाष्टक का जाप, शिव साधना, रुद्राभिषेकं, शिव अष्टोत्तर जाप, नारायण वंदना/साधना आदि (पुराणों के अनुसार विष्णु ने ही अपने सुदर्शन चक्र से दैत्य राहू को दो भागों में विच्छेदित कर अन्तरिक्ष में १८० डिग्री में स्थापित किया ताकि कभी ये दोनों मिल न सकें इसलिए नारायण वंदना/साधना का बड़ा महत्व है) कुंडली के सूक्ष्म अध्ययन से व्यक्तिगत विश्लेषण के द्वारा ही exact उपाय निकाला जा सकता है |
अगर जातक के पास समय का अभाव है या सशक्त भक्ति और सम्पूर्ण समपर्ण की कमी है तो दान का महत्त्व है | जैसे शनिवार के दिन या साल के कुछ प्रत्येक समयों पर नाग-नागिन का नदी में विसर्जन, कुष्ट रोगियों के आश्रम/अस्पताल में हो सके तो उत्तम, अथवा गरीबों को नीला वस्त्र, कम्बल, लोहे की item आदि का दान, भैरव के मंदिर में कुत्तों को खाना डालना (भैरव की सवारी कुत्ता मानी गयी है), शिव मंदिर में ध्वजा फहराना (केतु को शिखध्वज भी माना गया है) आदि ऐसे कई दान उपायों से इस दोष का निवारण किया जा सकता है | फिर कहना होगा की कुंडली के सूक्ष्म अध्ययन से व्यक्तिगत विश्लेषण के द्वारा ही exact उपाय निकाला जा सकता है |
काल सर्प दोष (Kaal Sarp dosh) निवारक महा सर्प यंत्र
कुछ लोग सिर्फ तंत्र में या यंत्रों में विश्वास रखते हैं |ऐसे लोगों के लिए कुछ यन्त्र हैं जैसे राहू यंत्र, राँगे में बने राहू के तांत्रिक विसर्जन प्रतिरूप, गोमेद लहसुनिया धारण या फिर मेरे द्वारा निर्मित महासर्प यन्त्र की स्थापना, साधना और विस्थापन | महासर्प यन्त्र एक अचूक उपाय है जिसे काल सर्प दोष निवारण के लिए सर्प स्वरुप में पीतल में निर्मित किया गया है और कुंडली के सूक्ष्म अध्ययन से व्यक्तिगत विश्लेषण के द्वारा ही मैं exact साधना विधि निर्धारित कर कालसर्प दोष का निवारण करता हूँ |

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